डीसीपी (ईस्ट) आई. बी. रानी ने बताया कि झिलमिल कॉलोनी में रहने वाले धर्म सिंह का स्क्रैप का बिजनेस है। उनका बेटा विकास उर्फ गोलू (14) सातवीं क्लास में पढ़ता था। 15 दिसंबर को उन्होंने विवेक विहार थाने में अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने उनके बयान पर अपहरण का केस दर्ज किया था। 23 दिसंबर को अपहर्ताओं ने धर्म सिंह के पास फोन कर उनसे बेटे की सकुशल रिहाई की एवज में 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी। अगले दिन भी फोन किया। अपहर्ताआंे ने सभी कॉल पीसीओ बूथ से की।
पुलिस ने अपहर्ताओं की धरपकड़ के लिए स्पेशल स्टाफ के इंस्पेक्टर राकेश दीक्षित की देखरेख में एसआई विनायक यादव, सतेंद्र खारी, एएसआई सतपाल सिंह, कॉन्स्टेबल प्रवीण और लोकेंद्र सहित अन्य पुलिसकर्मियों की एक टीम बनाई गई। जांच से पता चला अपहर्ताओं ने अब तक जितनी भी कॉल की वे सभी लोनी और करावल नगर के पीसीओ बूथ से की गई है। शुक्रवार दोपहर अपहर्ताओं ने बच्चे के पिता को किसी मोबाइल से फोन किया और आठ लाख रुपये लेकर बच्चा छोड़ने के लिए तैयार हो गए।
छानबीन के दौरान पुलिस को धर्म सिंह के परिचित अनिल कुमार शर्मा पर शक हुआ। वह पहले झिलमिल इलाके में ही रहता था, लेकिन पिछले कुछ समय से वह करावल नगर इलाके में रह रहा था। पुलिस ने अनिल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने गुमराह किया। लेकिन उसके दो छोटे बच्चों ने पुलिस को बता दिया कि पापा एक मोटे लड़के को साथ लेकर आए थे। इसके बाद अनिल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस ने उसके दो साथियों को भी धर दबोचा। उनकी निशानदेही पर ट्रांसफार्मर के लिए बनाए गए कमरे से बच्चे का कंकाल भी बरामद किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मनीष और निखिल ही बच्चे के पिता से फोन पर बात करते थे। उन्होंने 31 दिसंबर को गांधी नगर से फर्जी आईडी पर सिम कार्ड खरीदकर बच्चे के पिता से बात की। पूछताछ के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ कि अपहरण करने से पहले अनिल ने 3-4 दिन तक बच्चे को खूब खिलाया पिलाया।
अनिल 1992 में रिजर्व बैंक में अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम करता था। वह सवा साल से बेरोजगार था। उसका दूसरा साथी भी बेरोजगार है, जबकि तीसरा साथी बारहवीं क्लास की पढ़ाई कर रहा है।
बेरोजगारी ने हमारे देश में जुर्म के ग्राफ को इतना बड़ा दिया है कि देश के दबंग कि तादाद भी बदती जा रही है |